Sunday, 16 December 2018

RTI के तहत प्रथम अपील कब और कैसे करें

RTI
RTI


Thursday, 13 December 2018

RTI आवेदन कैसे और कब करें।

आरटीआई
RTI

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अपनी यात्रा में काफी उपलब्धियां हासिल कर चुका है। नागरिकों न केवल महत्वपूर्ण सूचनाएं ही प्राप्त हो रही हैं बल्कि ये सूचनाएं कई बार सिर्फ सूचनाओं तक ही नहीं सीमित होकर अपनी उपयोगिता कई परिप्रेक्ष्य में सिद्ध करती है। केंद्र राज्य स्तर पर सभी विभागों में सूचना का अधिकार लागू कर दिया गया है और इसके लिए अलग विभाग से लेकर कार्यालयों में सूचना की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए कार्यरत कर्मचारियों को मनोनीत लोक सूचना अधिकारी के रुप में नियुक्त किया गया गया है। सूचना की अनुपलब्धता की स्थिति में प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, द्वितीय अपील के साथ कुछ विशेष स्थितियों में सीधे तौर आयोग में भी अपील की जा सकती है। कई राज्यों ने सूचना के अधिकार में लोगों की सहायता के लिए सूचना और प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए पूरी तरह से समर्पित आरटीआई की वेबसाईट का निर्माण किया है और आवेदन करने और उसे जमा करने के लिए ऑनलाईन का विकल्प भी उपलब्ध कराया है। कुछ राज्यों ने टोल फ्री नंबर की सेवा भी प्रारंभ की है।

सूचना का अधिकार-सांविधानिक प्रावधान

सूचना के अधिकार का दर्ज़ा उपयोगिता और इस बात से सिद्ध होता है कि संविधान में इसे मूलभूत अधिकार का दर्ज़ा दिया गया है। आरटीआई का अर्थ है सूचना का अधिकार और इसे संविधान की धारा 19 (1) के तहत एक मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है। धारा 19 (1), जिसके तहत प्रत्‍येक नागरिक को बोलने और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता दी गई है और उसे यह जानने का अधिकार है कि सरकार कैसे कार्य करती है, इसकी क्‍या भूमिका है, इसके क्‍या कार्य हैं आदि।सूचना का अधिकार अधिनियम प्रत्‍येक नागरिक को सरकार से प्रश्‍न पूछने का अधिकार देता है और इसमें टिप्‍पणियां, सारांश अथवा दस्‍तावेजों या अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों या सामग्री के प्रमाणित नमूनों की मांग की जा सकती है।
आरटीआई अधिनियम पूरे भारत में लागू है (जम्‍मू और कश्‍मीर राज्‍य के अलावा) जिसमें सरकार की अधिसूचना के तहत आने वाले सभी निकाय शामिल हैं जिसमें ऐसे गैर सरकारी संगठन भी शामिल है जिनका स्‍वामित्‍व, नियंत्रण अथवा आंशिक निधिकरण सरकार द्वारा किया गया है।

शिकायत कब करें 

इस अधिनियम के प्रावधान 18 (1) के तहत यह केन्‍द्रीय सूचना आयोग या राज्‍य सूचना आयोग का कर्तव्‍य है, जैसा भी मामला हो, कि वे एक व्‍यक्ति से शिकायत प्राप्‍त करें और पूछताछ करें।
  1. जो केन्‍द्रीय सूचना लोक अधिकारी या राज्‍य सूचना लोक अधिकारी के पास अपना अनुरोध जमा करने में सफल नहीं होते, जैसा भी मामला हो, इसका कारण कुछ भी हो सकता है कि उक्‍त अधिकारी या केन्‍द्रीय सहायक लोक सूचना अधि‍कारी या राज्‍य सहायक लोक सूचना अधिकारी, इस अधिनियम के तहत नियुक्‍त न किया गया हो जैसा भी मामला हो, ने इस अधिनियम के तहत अग्रेषित करने के लिए कोई सूचना या अपील के लिए उसके आवेदन को स्‍वीकार करने से मना कर दिया हो जिसे वह केन्‍द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्‍य लोक सूचना अधिकारी या धारा 19 की उपधारा (1) में निर्दिष्‍ट राज्‍य लोक सूचना अधिकारी के पास न भेजे या केन्‍द्रीय सूचना आयोग अथवा राज्‍य सूचना आयोग में अग्रेषित न करें,जैसा भी मामला हो।
  2. जिसे इस अधिनियम के तहत कोई जानकारी तक पहुंच देने से मना कर दिया गया हो। ऐसा व्‍यक्ति जिसे इस अधिनियम के तहत निर्दिष्‍ट समय सीमा के अंदर सूचना के लिए अनुरोध या सूचना तक पहुंच के अनुरोध का उत्तर नहीं दिया गया हो।
  3. जिसे शुल्‍क भुगतान करने की आवश्‍यकता हो, जिसे वह अनुपयुक्‍त मानता / मानती है।
  4. जिसे विश्‍वास है कि उसे इस अधिनियम के तहत अपूर्ण, भ्रामक या झूठी जानकारी दी गई है।
  5. इस अधिनियम के तहत अभिलेख तक पहुंच प्राप्‍त करने या अनुरोध करने से संबंधित किसी मामले के विषय में।

सूचना प्राप्ति की प्रक्रिया

  1. आप सूचना के अधिकार अधिनियम- 2005 के अंतर्गत किसी लोक प्राधिकरण (सरकारी संगठन या सरकारी सहायता प्राप्त गैर सरकारी संगठनों) से सूचना प्राप्त कर सकते हैं।
  2. आवेदन हस्तलिखित या टाइप किया होना चाहिए। आवेदन प्रपत्र भारत विकास प्रवेशद्वार पोर्टल से भी डाउनलोड किया जा सकता है। आवेदन प्रपत्र डाउनलोड संदर्भित राज्य की वेबसाईट से प्राप्त करें
  3. आवेदन अँग्रेजी, हिन्दी या अन्य प्रादेशिक भाषाओं में तैयार होना चाहिए।
  4. अपने आवेदन में निम्न सूचनाएँ दें:
    • सहायक लोक सूचना अधिकारी/लोक सूचना अधिकारी का नाम व उसका कार्यालय पता,
    • विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम- 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन
    • सूचना का ब्यौरा, जिसे आप लोक प्राधिकरण से प्राप्त करना चाहते हैं,
    • आवेदनकर्त्ता का नाम,
    • पिता/पति का नाम,
    • वर्ग- अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ी जाति
    • आवेदन शुल्क
    • क्या आप गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवार से आते हैं- हाँ/नहीं,
    • मोबाइल नंबर व ई-मेल पता (मोबाइल तथा ई-मेल पता देना अनिवार्य नहीं)
    • पत्राचार हेतु डाक पता
    • स्थान तथा तिथि
    • आवेदनकर्त्ता के हस्ताक्षर
    • संलग्नकों की सूची
  5. आवेदन जमा करने से पहले लोक सूचना अधिकारी का नाम, शुल्क, उसके भुगतान की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर लें।
  6. सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र के साथ शुल्क भुगतान का भी प्रावधान है। परन्तु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति या गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के सदस्यों को शुल्क नहीं जमा करने की छूट प्राप्त है।
  7. जो व्यक्ति शुल्क में छूट पाना चाहते हों उन्हें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/बीपीएल प्रमाणपत्र की छायाप्रति जमा करनी होगी।
  8. आवेदन हाथो-हाथ, डाक द्वारा या ई-मेल के माध्यम से भेजा जा सकता है।
  9. यदि आप आवेदन डाक द्वारा भेज रहे हैं तो उसके लिए केवल पंजीकृत (रजिस्टर्ड) डाक सेवा का ही इस्तेमाल करें। कूरियर सेवा का प्रयोग कभी न करें।
  10. आवेदन ई-मेल से भेजने की स्थिति में जरूरी दस्तावेज का स्कैन कॉपी अटैच कर भेज सकते हैं। लेकिन शुल्क जमा करने के लिए आपको संबंधित लोक प्राधिकारी के कार्यालय जाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में शुल्क भुगतान करने की तिथि से ही सूचना आपूर्ति के समय की गणना की जाती है।
  11. आगे उपयोग के लिए आवेदन पत्र (अर्थात् मुख्य आवेदन प्रपत्र, आवेदन शुल्क का प्रमाण, स्वयं या डाक द्वारा जमा किये गये आवेदन की पावती) की 2 फोटोप्रति बनाएं और उसे सुरक्षित रखें।
  12. यदि अपना आवेदन स्वयं लोक प्राधिकारी के कार्यालय जाकर जमा कर रहे हों, तो कार्यालय से पावती पत्र अवश्य प्राप्त करें जिसपर प्राप्ति की तिथि तथा मुहर स्पष्ट रूप से अंकित हों। यदि आवेदन रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेज रहे हों तो पोस्ट ऑफिस से प्राप्त रसीद अवश्य प्राप्त करें और उसे संभाल कर रखें।
  13. सूचना आपूर्ति के समय की गणना लोक सूचना अधिकारी द्वारा प्राप्त आवेदन की तिथि से आरंभ होता है।

याद रखने योग्य बातें


क्रम संख्या
स्थिति
सूचना आपूर्ति की समय-सीमा
1
सामान्य स्थिति में सूचना की आपूर्ति
30 दिन
2
जब सूचना व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित हों, तब सूचना की आपूर्ति
48 घंटे
3
जब आवेदन सहायक लोक सूचना अधिकारी के जरिये प्राप्त होता है, वैसी स्थिति में सूचना की आपूर्त्ति
उपर्युक्त दोनों स्थितियों में 05 दिन का समय और जोड़ दिये जाएंगे।

    स्रोत: rti.gov.in
    अधिक जानकारी के लिए हमें मेल करे sanjayv176@gmail.com

    Saturday, 8 December 2018

    Life में कैसे मिलती है संघर्ष से सफलता l

    Struggle
    Struggle

     

    आज हर कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफल होना चाहता है.वह अपने जीवन में आगे बढना चाहता है. हर व्यक्ति की यही चाहत है की वह कुछ difrent करे जिससे उसको एक अलग पहचान मिले.सफलता के लिए प्रबल प्रेरणा व्यक्ति को शिखर तक पहुँचा देती है. लेकिन उस सफलता को कैसे हासिल करे ? यह बहुत ही कम लोग जान पाते है और अधिकतर लोग अपने सपनो को सच करने से चूक जाते है और उनकी मन की इच्छा आधी-अधूरी रह जाती है.


    Struggle Gave You Success In Hindi

    आप अपने आसपास ही ऐसे उदाहरण ढूंढने निकलोगे तो कई example आपको मिल जायेंगे जो अपने जीवन में सफल होने की इच्छा तो रखते थे और खुद को सफल इंसान बनाना चाहते थे पर अपने हालत और समय के चक्र में फंस गये और जिंदगी में थोड़ी सी लापरवाही से अपने सफल जीवन से लाखो मील दूर चले गये.
    इसलिए हमें सफल होने के लिए आवश्यकता होती है ऐसे motivation की जो हमें सफलता का रास्ता दिखाएँ और उस रास्ते में हमारा सहायक हो. हम यहाँ आपको सफलता के कुछ ऐसे tips बता रहे है जो आपको सफलता की सीड़ियाँ चढ़ने में पूरी मदद करेंगे.
    सपने बड़े देखो :
    पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने कहा था- हर व्यक्ति को बड़े सपने देखने चाहिए. सपने वो नहीं होते है जो नींद में आये,सपने तो वे होते है जो नींद न आने दे. सोते-सोते सपने देखना तो हर किसी के लिए आसान है. लेकिन हम यहाँ उन सपनो की बात कर रहे है, जिसमें प्रत्येक युवा अपने career को लेकर सपने देखता है.
    गरीब घर का लड़का अपने गरीबी से ऊपर उठकर अपनी गरीबी मिटाना चाहता है,बोर्ड परीक्षा का student अच्छे नंबर लाना चाहता है. अगर मैं अपनी बात करूँ तो मेरा सपना इंडिया का best blogger बनना है. जो लोग बड़े सपने नहीं देखते है वे लोग कभी बड़े नही बन सकते.
    एक middle class परिवार में पैदा हुए डॉ. कलाम देश के प्रथम व्यक्ति यानि राष्ट्रपति बने.इसका कारण था उनके बड़े सपने, जिसके कारण वे इतने बड़े मुकाम को हासिल कर पाए. जब हम बड़े सपने देखेंगे तभी तो हम उन सपनो को हासिल करने के लिए अपने effort लगायेंगे.
    कोई भी आदमी shortcut से succesful नहीं हो जाता. उसके पीछे होता है उनके बड़े सपने और उन सपनो को पाने के लिए एक बड़ी जिद, कठिन परिश्रम, खुद के लक्ष्य के प्रति ईमानदारी और दृढसंकल्प. अगर आपको succesful होना है तो आपको सपने देखने ही पड़ेंगे.तब ही आप उन सपनो के लिए कर्म करोगे.अगर आपने अपना सपना पहचान लिया उसके बाद आपको सफल होने से कोई रोक नहीं पायेगा.
    हर अवसर को पहचाने :
    अगर आप उन लोगो में से हो जो सोचते है की अवसर खुद तुम्हारे पास आएगा तो आप पूरी तरह से गलत हो. कोई भी कार्य अपने आप नहीं होता. आपको अगर आपकी राह पर कोई भी chance मिले तो उसको पहचानो. आप अपनी लाइफ की चाहे जिस भी स्टेज पर हो आपको अपने लिएसही अवसर को पहचानना ही पड़ेगा.
    आपने अक्सर सुना होगा की अगर किसी व्यक्ति पर समय मेहरबान हो गया तो उसको बहुत ऊपर लेकर जाता है. इस चीज का आखिर मतलब क्या है ? मतलब है सही अवसर. जो आदमी ऊँचाइयों को छूता है वह सही समय पर आये सही अवसर को पहचान लेता है जिस कारण वह सफलता की ओर बढ़ता चला जाता है.
    बहुत सारे लोगो के जीवन में अवसर लोगो का द्वार एक बार नहीं बल्कि बार-बार खटखटाता है लेकिन ऐसे बहुत ही कम लोग होते है जो उस द्वार खटखटाने की आवाज सुनकर द्वारा खोलते है.
    इसके लिए जरुरी है किसी भी chance पर नजरे गड़ाये रखना. जिस तरह से जंगल का राजा शेर अपने शिकार पर नजरे बनाये रखता है और उचित अवसर पर शिकार मिलते ही उस पर झपट पड़ता है. ठीक उसी तरह आप भी अवसर को पहचाने. यह बात ध्यान रखे की कोई भी अवसर आपकी लाइफ में बार-बार नहीं आएगा. इसलिए हर उचित अवसर को पहचानो और उसे पाने के लिए जी-जान से टूट पड़ो.
    दृढ़निश्चय करे :
    दृढ़निश्चय का सीधे शब्दों में अर्थ है- आप अपने लक्ष्य के प्रति कितने ईमानदार है,लक्ष्य के प्रति कितने समर्पित है. यह चीज आपके सफलता के बारे में पूरी कहानी बता देगी यानि की आप कितना सफल होओगे. आपने सपने तो देख लिए बहुत अच्छी बात है और आपकी लाइफ में उन सपनों को पाने का उचित अवसर भी आ गया.
    लेकिन अगर आप उस सपने को,उस लक्ष्य को,उस अवसर के प्रति दृढ़ संकल्प नहीं है तो आप यकींन मानिये की आप एक दिन सफलता की राह से फिसल जाओगे और वहां से फिर खड़े होना और फिर से चलना आसान नहीं होगा. दृढ़ संकल्प आपको फिसलने से बचाता है.
    आपके सपनो से दूर ले जाने वाली चीजो से,हालात से आपको पूरी तरह बचाता है.जिस कारण आपके जीवन में कठिन समय पर भी आप बिखरते नहीं और आप अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते है और अपने सपनो को पाने की राह में निरंतर चलते रहते है.
    कोई भी काम करना और दृढ़निश्चय से कोई भी काम करना. इन दोनों में बहुत अंतर है. एक उदाहरण से देखते है-
    परीक्षा के दिनों में एक student पढ़ रहा है वही दूसरा student पूरे दृढ़निश्चय के साथ पढ़ रहा है तो ये दोनों ही स्थिति अलग-अलग है. जो student सामान्य तौर पर पढ़ रहा है वह शायद पास हो जायेगा.लेकिन वही जो student पूरे समर्पण से पढाई करने में जुटा है उसको अच्छे नम्बर लाने से कोई रोक नहीं सकता क्योंकि वह अपने पढाई के प्रति संकल्पवान है.
    समर्पित होकर काम करने का मतलब है, आप अपने कार्य के प्रति पूरी तरह ईमानदार है.आप उस कार्य को करने के लिए अपनी प्रतिभा,क्षमता और उस कार्य के प्रति पूरी तरह एकाग्र रहोगे. आप उस कार्य के नफे-नुक्सान को अच्छी तरह से जान जाओगे.तब भला आपके कार्य को सफल होने से कौन रोक पायेगा. इसलिए अपने कार्य,अपने सपनो,अपने लक्ष्य के प्रति हमेशा दृढ़संकल्प रहे.
    रिस्क उठाने के लिए तैयार रहे :
    सफलता की राह में हमें कई बार खतरे उठाने पड़ सकते है तो तब risk उठाने से न डरे.अगर आपको लगता है कि आपके risk लेने से सफल होने की सम्भावना अधिक है तो आप risk ले सकते है.वैसे भी बिजनेस का एक important rool होता है की अगर ज्यादा फायदा कमाना हो तो risk लेना ही पड़ेगा.
    इसका मतलब है risk लेने से लाभ की आशंका अधिक रहती है. लेकिन यह बात ध्यान रखे की यह risk वह हो जो आप ले सकते हो जो आपकी शक्ति और योग्यता के अनुसार ही हो. जिंदगी तो एक बार ही मिलेगी तो risk उठाने से संकोच किसलिए. अगर आप उसमे सफल नहीं भी हुए तो घबराए मत. यह risk न उठाने से बेहतर ही है.
    दोस्तों ! यह अनमोल जिंदगी बार-बार नहीं मिलती. सभी को जीवन सिर्फ एक बार ही मिलता है और इस जिंदगी में कई ऐसे लोग होते है जो सफलता के झंडे गाड़ देते है तो वही किसी का कोई वजूद ही नहीं होता. अब आपको खुद यह तय करना है की आप कैसा जीवन चाहते है. एक सफल व्यक्ति जिसका अपना एक अलग मुकाम हो या फिर एक सामान्य आदमी जो एक चलती भीड़ का हिस्सा हो.
    यह याद रखे की हर किसी को इसी लाइफ में सबकुछ करना होता है.जो व्यक्ति अपने सपनो के लिए संघर्ष करता है.वह एक दिन अपने सपनो को साकार कर देता है तो वही जिस व्यक्ति ने कभी सपने ही नहीं देखे तो उससे सपनो की बात करने का फायदा ही क्या.
    उस आदमी की हालत उस कुएं के मेढक की तरह होती है जो अपनी पूरी जिंदगी उस कुएं के अन्दर ही गुजार देता है और इस दुनिया से चला जाता है.आप अपने जीवन के प्रति थोड़े जागरूक होवे. खुद की परवाह करे.आपका जीवन आपके लिए ही तो है.अपने सपने देखे और उन सपनो को पूरा करने के लिए लड़ें न की किसी और के सपनो की जिन्दगी गुजारे. अगर आप खुश रहोगे तो सारी दुनिया भी अच्छी लगेगी.
    इसलिए सपने देखो, अपने लक्ष्य बनाओ और बढ़ा दो अपने कदम सफलता की राह की ओर और तब तक मत रूको जब तक सफलता न प्राप्त कर लो.

    Wednesday, 28 November 2018

    Life Changing अनमोल बचन

    Anmol vachan
    Anmol vachan

    Anmol Vachan in Hindi – जीवन में सभी लोग हमेशा उत्साहित रहना चाहते हैं और अपने कार्य को पूरे उत्साह के साथ करना चाहते हैं परन्तु कभी-कभी जीवन में लोग बहुत निराश हो जाते हैं. लोग एक ऐसी स्थिति में पहुँच जाते हैं जहाँ मस्तिष्क में अच्छी और सकारात्मक बाते आना बंद हो जाती हैं. ऐसे में आपको अच्छी किताबे (Good Books), अच्छे ब्लॉग (Good Blog), अनमोल बचन (Anmol Vachan), अनमोल ज्ञान (Anmol Gyan) से सम्बंधित चीजों को पढ़ना चाहिए जिससे आपके जीवन में फिर उमंग और उत्साह की लहर दौड़ जाए.
     जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक उर्जा की बहुत जरूरत होती हैं इसलिए आप हमेशा अच्छी बाते सोचे और पढ़े. इससे आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने में मदत मिलेगा.

    अनमोल वचन 1 (Anmol Vachan 1)

    24 घंटे में एक बार हमारी जिभ्वा और मस्तिष्क में सरस्वती जी विराजमान होती है इसलिए आप हमेशा अपने और दूसरो के बारे में अच्छा सोचे. क्या पता जो आप बोल रहे है या सोच रहे है उसी समय सरस्वती जी की कृपा हो और आप की बाते या सोच सच हो जाए. इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचे.

    अनमोल वचन 2 (Anmol Vachan 2)

    सीढियों की जरूरत उनको पड़ती हैं जिन्हें छत तक ही जाना हो. यदि आपकी मंजिल आकाश हैं तो आपको ख़ुद रास्ता बनाना होगा.
    अनमोल वचन 3 (Anmol Vachan 3)
    मुश्किलें केवल बहादुर लोगो के हिस्से में ही आती हैं, क्योकि वो लोग उसे बड़ी बहादुरी से अंजाम देने की ताकत रखते हैं.

    अनमोल वचन 4 (Anmol Vachan 4)

    मनुष्य में धैर्य होना चाहिए, जल्दबाजी नही.
    मनुष्य में बहादुरी होनी चाहिए, ज़िद्द नही.
    सोच सकारत्म होनी चाहिए, नकारात्मक नही.
    ज्ञान होना चाहिए, अहंकार नही.

    अनमोल वचन 5 (Anmol Vachan 5)

    सबसे पहले आप ख़ुद पर विश्वास करे और फिर ईश्वर पर विश्वास करे, इसके बाद आप उसी विश्वास के साथ अपने लक्ष्य को प्राप्त करे.

    अनमोल वचन 6 (Anmol Vachan 6)

    जीत हमारे जीवन में “प्रसन्नता” लाती हैं और हार हमारे जीवन में “समझदारी (ज्ञान)” लाती हैं.

    अनमोल वचन 7 (Anmol Vachan 7)

    नाव बदले से किनारे नही बदलते, दिशा बदलने से किनारे बदलते हैं. अपने लक्ष्य को न बदले अपने कार्य करने के तरीके को बदले.

    अनमोल वचन 8 (Anmol Vachan 8)

    जब हम किसी कार्य को करने के लिए सोचते हैं तो बहुत कठिन लगता हैं जब हम उसे कर देते हैं तो सोचते हैं कितना आसान था इसलिए सोचने में समय व्यर्थ न करे, कार्य को करने में समय का सदुपयोग करे.

    अनमोल वचन 9 (Anmol Vachan 9)

    जीवन में सफलता, प्रसन्नता का कारण नही होती हैं जबकि प्रसन्नता ही सफलता का मुख्य कारण हैं.

    अनमोल वचन 10 (Anmol Vachan 10)

    हार-जीत सिर्फ मनुष्य के मस्तिष्क में हैं क्योकि हार हो या जीत दोनों में कुछ-ना-कुछ हम पाते हैं.

    अनमोल वचन 11 (Anmol Vachan 11)

    थकान कभी भी, काम के कारण नही लगती हैं बल्कि चिंता, निराशा, भय और असंतोष के कारण होती हैं.

    अनमोल वचन 12 (Anmol Vachan 12)

    जो पत्थर छैनी और हथौड़ी की मार से टूट जाती हैं वह पत्थर सीढियों में लगा दी जाती हैं और जो मार सह लेती हैं वह मूरत बन जाती हैं और मंदिर में उसकी पूजा की जाती हैं.

    अनमोल वचन 13 (Anmol Vachan 13)

    बचपन में भी ग़जब का विश्वास था, हजारो बार गिरे पर खड़े होने से नही डरे.

    अनमोल वचन 14 (Anmol Vachan 14)

    रास्ते में कंकड़ हो तो आसनी से चला जा सकता हैं यदि जूते में कंकड़ हो तो एक क़दम भी चलना मुश्किल होता हैं.

    अनमोल वचन 15 (Anmol Vachan 15)

    दूध में मिला जल भी दूध बन जाता हैं. ठीक उसी तरह गुणवान व्यक्ति के साथ रहने से गुणहीन व्यक्ति भी गुणी बन जाता हैं.

    अनमोल वचन 16 (Anmol Vachan 16)

    हुनर सबमे होता हैं फर्क इतना हैं किसी का छिप जाता हैं और किसी का छाप जाता हैं.

    अनमोल वचन 17 (Anmol Vachan 17)

    ज्ञान से बड़ा कोई मित्र नही हैं और अज्ञानता से बड़ा कोई शत्रु नही.

    अनमोल वचन 18 (Anmol Vachan 18)

    यदि कोई मनुष्य समस्या का हल नही निकाल सकता हैं तो वह ख़ुद एक समस्या हैं.

    अनमोल वचन 19 (Anmol Vachan 19)

    जीवन के दुःख में ही सुख हैं और सुख में ही दुःख हैं.

    अनमोल वचन 20 (Anmol Vachan 20)

    कायर व्यक्ति अपने मृत्यु से पहले कई बार मरता हैं जबकि बहादुर व्यक्ति अपने जीवन में एक ही बार मृत्यु को प्राप्त होता हैं .
    अनमोल वचन 21 (Anmol Vachan 21)
    मनुष्य को अपने भीतर से अहंकार को निकाल कर स्वयं को हल्का रखना चाहिए, क्योकि ऊँचा वही उठता हैं जो हल्का होता हैं. अहंकार मनुष्य को आगे नही बढ़ने देता हैं

    अनमोल वचन 22 (Anmol Vachan 22)

    ज्ञान, ध्यान, धैर्य और कर्म सब गुरू की ही देन होती हैं इसलिए जीवन में एक सच्चा गुरू जरूर बनाये जो आपका मार्गदर्शन कर सके.

    अनमोल वचन 23 (Anmol Vachan 23)

    बुरे कर्मो का त्याग करना, अच्छे कर्म करने से भी अधिक महत्वपूर्ण हैं.

    अनमोल वचन 24 (Anmol Vachan 24)

    मनुष्य जितनी शीघ्रता से दूसरो में दोष देखता हैं यदि खुद में देखे तो वह एक महान व्यक्ति बन सकता हैं और किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता हैं.

    अनमोल वचन 25 (Anmol Vachan 25)

    जीवन में वह व्यक्ति सबसे ज्यादा ख़ुश होता हैं जो रह दिन कुछ-ना-कुछ सीखता हैं.

    अनमोल वचन 26 (Anmol Vachan 26)

    यदि कोई आपकी कमियाँ बता रहा हैं तो उसे ध्यानपूर्वक सुने. सही बोल रहा है तो सुधार करे. यही आपको अंदर से मजबूत करेगा और लक्ष्य को प्राप्त करने में मदत करेगा.

    अनमोल वचन 27 (Anmol Vachan 27)

    शक्ति और विकास निरंतर प्रयास और संघर्ष के माध्यम से ही आते हैं.

    अनमोल वचन 28 (Anmol Vachan 28)

    आप अपनी ताकत का अनुभव तब तक नही कर पाते जब तक आप और आपकी सबसे बड़ी कमज़ोरी आमने-सामने नही होते हैं.

    अनमोल वचन 29 (Anmol Vachan 29)

    यदि आपका लक्ष्य चुनौती पूर्ण नही है तो यह आपको और आपके जीवन को नही बदल सकता.

    अनमोल वचन 30 (Anmol Vachan 30)

    भय केवल मनुष्य के मस्तिष्क में होता हैं हकीकत में इसका कोई अस्तित्व ही नही हैं.

    अनमोल वचन 31 (Anmol Vachan 31)

    सफलता अनुभव से आती हैं और अनुभव, जीवन के उतार-चढ़ाव से आता हैं.

    अनमोल वचन 32 (Anmol Vachan 32)

    जो कर्म आपको अंदर से मजबूत बनाए वही अच्छा कर्म हैं. बुरा कर्म इंसान को अंदर से कमजोर बनाता हैं. अच्छा कर्म मन और हृदय को सुख, शांति और समृद्धि से भर देता हैं.

    अनमोल वचन 33 (Anmol Vachan 33)

    मनुष्य अपनी गलतियों से सबसे ज्यादा सीखता हैं परन्तु “गलती न हो जाए” इसलिए बहुत सारे कार्य को करता ही नही हैं.

    अनमोल वचन 34 (Anmol Vachan 34)

    धन होने से आप केवल धनवान हो सकते हैं परन्तु महान नही हो सकते हैं. महानता, केवल महान विचारो से ही आती हैं और यही विचार उच्च कार्य करने की प्रेरणा देते हैं.

    अनमोल वचन 35 (Anmol Vachan 35)

    मनुष्य को धैर्यवान होना चाहिए जिस प्रकार वृक्ष समय आने पर ही फल देते हैं उसी तरह मनुष्य का कर्म भी उचित समय आने पर फल देगा.

    अनमोल वचन 36 (Anmol Vachan 36)

    श्रेष्ठता ऊँचे कुल में जन्म लेने से नही आती, गुणों से इसका निर्माण होता हैं, दूध-दही-छाछ-घी, सब एक ही कुल के होते हुए भी, सबके मूल्य अलग-अलग होते हैं.

    अनमोल वचन 37 (Anmol Vachan 37)

    जब मार्ग की कठिनाइयाँ आपके आत्मबल को तोड़ने का प्रयास करती हैं तो सकारात्मक विचार ही आपको बल देती हैं.

    अनमोल वचन 38 (Anmol Vachan 38)

    जो व्यक्ति हर पल दुःख का रोना रोता हैं, उसके द्वार पर खड़ा सुख बाहर से ही लौट जाता हैं.

    अनमोल वचन 39 (Anmol Vachan 39)

    प्रशंसक (चाटुकार)आपको पहचान लेंगे परन्तु शुभचिंतको (कड़वा सच बोलने वाले) को आपको पहचानना पड़ेगा.

    अनमोल वचन 40 (Anmol Vachan 40)

    आप आने वाला कल नही बदल सकते हैं परन्तु अपने आदत जरूर बदल सकते हैं और आपकी आदतें निश्चित रूप से आने वाला कल बदल सकती हैं.

    Saturday, 24 November 2018

    Most important 6 आदतें आपको जरूर पढ़नी चाहिए


    Best habits
    आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं , ये आपही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं. आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता- चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षण, हर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए और positive result produce  करें.

    Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव- बनिए
    Proactive  होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार- बनना. आप हर चीज केलिए अपने parents  या  grandparents  को नही blame कर सकते . Proactive  लोग इस बात को समझते हैं कि वो रेस्पोंंसीबल है . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स , परिस्थितिय- ों, या परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होताहै कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोग reactive  होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावितहो- ते हैं. वो अपने behaviour  के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा है, तोउन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और  performance  को प्रभावित करता है, और वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना  की तरह काम करती हैं , जिन पर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिय- ा करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता- कि आप  अपनी प्रतिक्रिय- ा का चयन स्वयम कर सकते हैं. एक बेहद महत्त्वपूर- ्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate  करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँ, मैं करूँगा, etc. एक reactive  व्यक्ति reactive  भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकता, काश अगर ऐसा होता , etc. Reactive  लोग  सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.
    ऐसी परिस्थितिय- ां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है , उसपर react या चिंता करने के बजाये proactive  लोग अपना time  और  energy  ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो  control  कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं ,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:

    1)Circle of Concern ( चिंता का क्षेत्र )

    2)Circle of Influence. (प्रभाव का क्षेत्र )
    Proactive  लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य , बच्चे , कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive  लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण , आतंकवाद, मौसम. इसबात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive  बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है
    Habit 2: Begin with the End in Mind  अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें.
    तो , आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं? शायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थे, जिसका सपना आपने देखा था, क्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं–ऐसी सफलता, जिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को  गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवार पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.

    Habit 2  आपके imagination या  कल्पना  पर आधारित है– imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation, और दूसरा physical creation. जिस  तरह blue-print तैयार होने केबाद मकान बनता है , उसी प्रकार mental  creation  होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद  visualize  नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आप, आपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितिय- ों पर छोड़ देते हैं. Habit 2  इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और  ethical  guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं.अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ है, हर दिन ,काम या project  की शुरआत एक clear vision  के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिए, और फिर proactively  उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.
    Habit 2  को practice मेंलाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टिकरता- है कि आप कौन हैं,आपके goals को focus  में रखता है, और आपके ideas  को इस दुनिया में लाता है. आपका Mission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं, और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं.
    Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें
    एक balanced life  जीने के लिए, आपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगीमे- ं हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकिये, और फिर अपनी important priorities पर focus  कीजिये.
    Habit 1  कहतीहै कि , ” आप in charge हैं .आप creator हैं”. Proactive होना आपकी अपनी choice है. Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize  करने के बारे में है. अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3  दूसरी creation , यानि  physical creation  के बारे में है. इस habit में Habit 1 और Habit 2  का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management  से related कई प्रश्नों को  deal  करता है.
    लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है. Habit 3  life management  के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles ,और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं?  प्राथमिक चीजें वह हैं , जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों. यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि , आप अपना समय , अपनी उर्जा Habit 2  में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं.
    Habit 4: Think Win-Win  हमेशा जीत के बारे में सोचें
    Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं है, ना ही यह कोईshort-cut है. यहcharacter पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों सेinteract और सहयोग करने के लिए है.
    हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों सेcomparison और  competition  के आधार पर करते हैं. हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीता, तो तुम हारे, तुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एकzero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी हो, और अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगा, और मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी येgame  खेलते हैं, लेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?
    Win -Win ज़िन्दगी कोco-operation की तरह देखती है, competition कीतरह नहीं.Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमेंलगातार- सभी काहित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Win का अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं. इसमें सभी   खाने को मिलती है, और वो काफी अच्छाtaste  करती है.
    एक व्यक्ति या संगठन जोWin-Win attitude  के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:




  1.  Integrity / वफादारी :अपनेvalues, commitments औरfeelings के साथ समझौता ना करना.
  2. Maturity / परिपक्वता :  अपनेideas औरfeelings  को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
  3. Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता :इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.

  4. बहुत लोग either/or  केterms  में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीचbalance  करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपू- र्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वा- श से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करनाकि -courage और  consideration मेंbalance  स्थापित हो, यहीreal maturity  है, और Win-Win  के लिए बेहद ज़रूरी है.
    Habit 5: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.
    CommunicationÂ-   लाइफ की सबसे ज़रूरी skill  है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या है? आपको ऐसी कौनसी training  मिली है, जो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकें? शायद कोई नहीं? क्यों?
    अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्तिको पूरी तरह ignore कर देते होंगे , ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं परउनके असली मतलब को पूरी तरह से miss  कर जाते हैं.
     सोचिये- ऐसा क्यों होता है? क्योंकि ज्यादातर लोग इस intention  के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply  करना है, समझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी  करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपके life-experiences  से छनकर आप तक पहुचता है.
    आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है.  क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?
    “अरे, मुझे पता है कि तुम कैसा feel  कर रहे हो.मुझे भी ऐसा ही लगा था.” “मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था.” ” मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्तमें मैंने क्या किया था.”
    चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं. आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:
    Evaluating/ मूल्यांकन:�¤- �हले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
    Probing / जाँच :आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
    Advising/ सलाह :आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.
    Interpreting/ व्याख्या :आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience के हिसाब से analyze करते हैं.
    शायदआप सोच रहे हों कि, अपनेexperience के हिसाब से किसी सेrelate करने में बुराई क्याहै?कुछsi- tuations में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बतानेके लिए कहे, जब आप दोनों के बीच एकtrust कीrelationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.
    Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना
    सरल शब्दों में समझें तो , “दो दिमाग एक से बेहतर हैं ” Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.
    पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक process है , और उसी process से, लोग अपनेexperience और expertise को उपयोग में ला पाते हैं .अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छाresult दे पाते हैं. Synergy से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty–या उससे भी ज्यादा.
    जब लोग आपस में इमानदारी से interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ- मिलना प्रारम्भ हो जाता है. आपस में मतभेद नए तरीकों के आविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.
    मतभेदो�¤- ‚ को महत्त्व देना synergy का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं? या फिर आप ये चाहते हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं strength के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं.